शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

मेरी कविता


मेरी कविता 

संगीत-ज्योतिर्मय,
मेरी कविता 

समस्त संसार हुआ
ज्योतिर्मय,   

मधुर संगीत ध्वनि,
झंकृत कर,  

नदियों के प्रवाह में, 
कलकल,

निर्झर के प्रपात में,
झर झर,

दिक्-दिशायें,
तरंग मधुरमय  

खगवृन्द उड्डगण के,
नृत्य में,

लहराते खेतों में,
जीवन, 
रंगीन पुष्पों की,  
तान-श्रृंगार,

पवित्र संगीत की  धारा,
अनंत आकाशों के छोरों तक,

लहराने वाला जीवन,
संगीतमय श्वास लेता है,

अडचनों को पार कर,
सुखद गुनगुनाहट मृदु तान,

सुन,  मैं चकित,
आनंद-विभोर हो जाती हूँ,

मेरा हृदय विव्हल हो,
संगीत से जुड़,

मेरी आवाज़, अडचन,
फट फट जाती है.

और, मैं  विभोर, अचंबित, 
चुपचाप रो लेती हूँ , 

ओह मेरे प्रभु!
तुम्हारा मधुर! गीतसंगीत !! 

मम हृदय, अटूट-प्रेम पाश में,
बन्ध गया है!!
नया वर्ष पहन के आया माला,
बारहमासी मनकों की माला,

इसमें पिरोहे रंगीन मनके,
बड़े, छोटे, विभिन्न मनके,
कुछ मनके महीनों, दिनों के,
अधमासे, चौमासे मनके ,

माला में हफ्ते पिरोहे,
घंटे पिरोहे,पल,क्षण पिरोह
तरह तरह के रंग पिरोहे,
ऋतुओं के गर्म-ठंड पिरोहे,
वर्षा में भीगे नहाते मनके,
बासंती सतरंगी मनके,

प्रकृति बाला की शाश्वत माला,
सुन्दरी सजी पहन के माला,