शनिवार, 13 फ़रवरी 2016

सखि बसंत आया, सखि बसंत आया।
बगियन में फूल खिले,
कलियन में रंग मिले,
अंबुआ की डारी पर,
अम्बुआ बौराया !
सखि बसंत आया, सखि बसंत आया !
भँवरे की गुंजन में,
तितली के चुंबन में,
कोकिल ने जीवन का,
गीत गान गाया !
सखि बसंत आया, सखि बसंत आया !
मालिन की डलियन में
फूलन की लडियन में,
सुंदरी के बालों में,
गजरा हर्षाया,
सखि बसंत आया, सखि बसंत आया !
ठंडक में जान पड़ी,
ठिठुरन में घाम पड़ी,
चहुँ और ख़ुशी आन पड़ी,
मौसम हर्षाया,
सखि बसंत आया, सखि बसंत आया !