कुछ याद नहीं...
क्या बिसरूं, क्या याद करूं,
क्योंकर याद करूं?
क्यों बीती बातें रख
दिल में आबाद करूँ,
तुम्हारे संग बिताये,
पल जो अपने थे,
बेमाने हुए वे क्षण,
सुहाने सपने थे,
उन पलों को मन में रख
जीवन बरबाद करूँ?
क्या बिसरूं क्या याद करूं,
कुछ याद नहीं...
बचपन का निश्छल प्रेम
लगा था जो अपना,
खेल खेल में हंसी ठठा
था प्यारा सपना,
मस्ती में घंटों बैठ
गाना, बतियाना,
सुरमई रातों में
नदी किनारे पर जाना,
उस गुज़रे प्रेमालापों से
आज को आज़ाद करूँ ,
स्वप्निल गुज़रे पलों को
अब क्यों याद करूं,?
क्या बिसरूं, क्या याद करूं,
क्योंकर याद करूं?
शुक्रवार, 10 फ़रवरी 2012
गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012
हे वीणावरदंड मंडितकरा !
हे वीणावरदंड मंडितकरा !
वीणा वादिनी!
सरस्वती भगवती!
सु-मधुर स्वर दे!
वीणा वादिनी! वर दे,
तार मिलाये वीणा के जब,
कोमल मधुर संगीत मिला,
नवल रागिनी, ताल, लय, छंद
सरल नवल नवगीत मिला,
सुमधुर संगीतमीत वर दे...
कभी भैरवी, मालकौंश तो
बागेश्वरी, खमाज, की तान
भूपाली के स्वर, आलाप, लय,
कभी बजाऊँ बिहाग की बान,
कोमल मधुर संगीत स्वर दे...
तकधिन धिनधा,धागे नतीनक धिन,
रहूं संगीत में मगन रात दिन ,
गीत संगीत प्रिय मीत मेरा,
देवी सरस्वती-कृपा का घेरा,
मधुर जीवनसंगीत वर दे...
कोमल मधुर संगीत स्वर दे,
वीणा वादिनी! वर दे,.
वीणा वादिनी!
सरस्वती भगवती!
सु-मधुर स्वर दे!
वीणा वादिनी! वर दे,
तार मिलाये वीणा के जब,
कोमल मधुर संगीत मिला,
नवल रागिनी, ताल, लय, छंद
सरल नवल नवगीत मिला,
सुमधुर संगीतमीत वर दे...
कभी भैरवी, मालकौंश तो
बागेश्वरी, खमाज, की तान
भूपाली के स्वर, आलाप, लय,
कभी बजाऊँ बिहाग की बान,
कोमल मधुर संगीत स्वर दे...
तकधिन धिनधा,धागे नतीनक धिन,
रहूं संगीत में मगन रात दिन ,
गीत संगीत प्रिय मीत मेरा,
देवी सरस्वती-कृपा का घेरा,
मधुर जीवनसंगीत वर दे...
कोमल मधुर संगीत स्वर दे,
वीणा वादिनी! वर दे,.
-भिक्षा दे-दे मैया पिंगला!
राजा--भिक्षा दे-दे मैया पिंगला!
जोगी खड़ा है द्वार, मैया पिंगला!
रानी--जोग उतारो राजा भरथरी!
जोग उतारो राजा भरथरी!
रानी करे है पुकार राजा भरथरी!
रानी--कैसे देखूँ जोग तुम्हारा,
कैसे देखूँ जोग तुम्हारा,
गाऊँ प्रहार कतार
राजा भारतरी!
राजा--कर्म-लिखी ना मिटी किसी से,
कर्म-लिखी ना मिटी किसी से
करनहार करतार, मैया पिंगला!
रानी---केसर-चंदन छोड़ के राजा!
केसर-चंदन छोड़ के राजा!
लीन्ही बभूती डार, राजा भारतरी!
राजा--केसर काया राख बनेगी,
केसर काया राख बनेगी
इसमें क्या सिंगार,
मैया पिंगला!
रानी--महलों में आओ राजा भरथरी
अलख जगाओ राजा भरथरी ,
अलख जगाओ महल में राजा,
दूंगी मैं आँचल डार,
राजा भारतरी!
राजा--जोगी तो जंगल के बासी,
जोगी तो जंगल के बासी,
कैसा घर-संसार? मैया पिंगला!
रानी--दया ना आई ओ निरमोही,
दया ना आई ओ निरमोही
छोड़ चले मझधार,
राजा भारतरी!
राजा--अलख निरंजन
अलख निरंजन,
अलख निरंजन
अलख निरंजन,
गाओ री मंगलाचार,
मैया!
होवो भव-सागर पार,
मैया पिंगला!
जोगी खड़ा है द्वार, मैया पिंगला!
रानी--जोग उतारो राजा भरथरी!
जोग उतारो राजा भरथरी!
रानी करे है पुकार राजा भरथरी!
रानी--कैसे देखूँ जोग तुम्हारा,
कैसे देखूँ जोग तुम्हारा,
गाऊँ प्रहार कतार
राजा भारतरी!
राजा--कर्म-लिखी ना मिटी किसी से,
कर्म-लिखी ना मिटी किसी से
करनहार करतार, मैया पिंगला!
रानी---केसर-चंदन छोड़ के राजा!
केसर-चंदन छोड़ के राजा!
लीन्ही बभूती डार, राजा भारतरी!
राजा--केसर काया राख बनेगी,
केसर काया राख बनेगी
इसमें क्या सिंगार,
मैया पिंगला!
रानी--महलों में आओ राजा भरथरी
अलख जगाओ राजा भरथरी ,
अलख जगाओ महल में राजा,
दूंगी मैं आँचल डार,
राजा भारतरी!
राजा--जोगी तो जंगल के बासी,
जोगी तो जंगल के बासी,
कैसा घर-संसार? मैया पिंगला!
रानी--दया ना आई ओ निरमोही,
दया ना आई ओ निरमोही
छोड़ चले मझधार,
राजा भारतरी!
राजा--अलख निरंजन
अलख निरंजन,
अलख निरंजन
अलख निरंजन,
गाओ री मंगलाचार,
मैया!
होवो भव-सागर पार,
मैया पिंगला!
मंगलवार, 7 फ़रवरी 2012
प्राण को तज जा रहे हैं, प्राण के महमान,
प्राण को तज जा रहे हैं,
प्राण के महमान,
विरह मिलन है रीत निराली,
यही है जग की रीत,
प्राण को तज जा रहें,
आज मन के मीत,
हे हृदय तू गा विदा के,
आज आकुल गान,
प्राण को तज जा रहे हैं,
प्राण के महमान,
ऑंखें मेरी भर भर आतीं,
आंसुओं की झड़ी लगाती,
हृदय की पीड़ा बनी है,
बन के निकली गीत,
प्राण निकले जा रहें,
हे प्राण के मीत,
विहग जाओ,
धीर पंखों में लिए पतवार,
पार कर लो,
नील नभ सा विश्व पारावार,
हो तुम्हें आलोक शत शत,
मिलन के मेहमान,
कलरवों में बह चले,
मिल शत हृदय की त्राण।
प्राण को तज जा रहे हैं,
प्राण के मेहमान
प्राण के महमान,
विरह मिलन है रीत निराली,
यही है जग की रीत,
प्राण को तज जा रहें,
आज मन के मीत,
हे हृदय तू गा विदा के,
आज आकुल गान,
प्राण को तज जा रहे हैं,
प्राण के महमान,
ऑंखें मेरी भर भर आतीं,
आंसुओं की झड़ी लगाती,
हृदय की पीड़ा बनी है,
बन के निकली गीत,
प्राण निकले जा रहें,
हे प्राण के मीत,
विहग जाओ,
धीर पंखों में लिए पतवार,
पार कर लो,
नील नभ सा विश्व पारावार,
हो तुम्हें आलोक शत शत,
मिलन के मेहमान,
कलरवों में बह चले,
मिल शत हृदय की त्राण।
प्राण को तज जा रहे हैं,
प्राण के मेहमान
मेरी कामना-
मेरी कामना-
कि
मधुर वार्तालापों के अंतराल,
प्रेमपूर्ण निहारूं अविरल
कि
स्वहस्त नव निर्मित लिफाफे में
प्रेमी को लिखे पत्र के साथ बंद रहूँ.
कि
खेत जोतने के परिश्रम से
हाथ-पैरों के तलवों में पड़े
दृष्टअदृष्ट छालों में रहूँ.
कि
स्कूल तथा कक्षामें जहाँ
ईमानदारी, वादे व उत्साह
को बल मिलता है, में रहूँ.
कि
कार्यरत माँ की सांसों,
उसकी क़ुरबान धडकनों में,
तथा निष्कपट पिता के स्कूटर के
घिस्से पहिये में निवास करूं.
कि
पर्वत समान अडिग हृदय
जो समय के नृशंस थपेड़ों के विरुद्ध,
हरेक पवित्र काम में
धडकता रहता है,
में रहूँ...
कि
जहाँ प्यार का आभास हो,
मधुर विजय गीत
गुंजायमान हों
वहां तनिक भ्रमण करूं
समय बिताऊं-
कि...
कि
मधुर वार्तालापों के अंतराल,
प्रेमपूर्ण निहारूं अविरल
कि
स्वहस्त नव निर्मित लिफाफे में
प्रेमी को लिखे पत्र के साथ बंद रहूँ.
कि
खेत जोतने के परिश्रम से
हाथ-पैरों के तलवों में पड़े
दृष्टअदृष्ट छालों में रहूँ.
कि
स्कूल तथा कक्षामें जहाँ
ईमानदारी, वादे व उत्साह
को बल मिलता है, में रहूँ.
कि
कार्यरत माँ की सांसों,
उसकी क़ुरबान धडकनों में,
तथा निष्कपट पिता के स्कूटर के
घिस्से पहिये में निवास करूं.
कि
पर्वत समान अडिग हृदय
जो समय के नृशंस थपेड़ों के विरुद्ध,
हरेक पवित्र काम में
धडकता रहता है,
में रहूँ...
कि
जहाँ प्यार का आभास हो,
मधुर विजय गीत
गुंजायमान हों
वहां तनिक भ्रमण करूं
समय बिताऊं-
कि...
क्षणक्षण पलपल सरक रहा
क्षणक्षण प्रतिपल सरक रहा,
सरक रहा हर साल जी,
तिथि बदल कर, माह बदलता
बदल जाता तब साल जी,
आगंतुक मेहमान खास है,
स्वागत करो व मान जी,
तुम्हारा इसका साथ रहेगा,
सालभर, रहे ध्यान जी.
थोड़े दिन मेहमान रहेगा,
फिर बने मेज़बान जी.
काल चक्र चलता रहेगा,
इसही तरह हो ज्ञान जी.
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सरक रहा हर साल जी,
तिथि बदल कर, माह बदलता
बदल जाता तब साल जी,
आगंतुक मेहमान खास है,
स्वागत करो व मान जी,
तुम्हारा इसका साथ रहेगा,
सालभर, रहे ध्यान जी.
थोड़े दिन मेहमान रहेगा,
फिर बने मेज़बान जी.
काल चक्र चलता रहेगा,
इसही तरह हो ज्ञान जी.
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नया वर्ष पहन के आया माला,
नया वर्ष पहन के आया माला,
बारहमासी मनकों की माला,
इसमें पिरोहे रंगीन मनके,
बड़े, छोटे, विभिन्न मनके,
कुछ मनके महीनों, दिनों के,
अधमासे, चौमासे मनके ,
माला में हफ्ते पिरोहे,
घंटे पिरोहे,पल,क्षण पिरोह
तरह तरह के रंग पिरोहे,
ऋतुओं के गर्म-ठंड पिरोहे,
वर्षा में भीगे नहाते मनके,
बासंती सतरंगी मनके,
प्रकृति बाला की शाश्वत माला,
सुन्दरी सजी पहन के माला,
बारहमासी मनकों की माला,
इसमें पिरोहे रंगीन मनके,
बड़े, छोटे, विभिन्न मनके,
कुछ मनके महीनों, दिनों के,
अधमासे, चौमासे मनके ,
माला में हफ्ते पिरोहे,
घंटे पिरोहे,पल,क्षण पिरोह
तरह तरह के रंग पिरोहे,
ऋतुओं के गर्म-ठंड पिरोहे,
वर्षा में भीगे नहाते मनके,
बासंती सतरंगी मनके,
प्रकृति बाला की शाश्वत माला,
सुन्दरी सजी पहन के माला,
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