क्षणक्षण प्रतिपल सरक रहा,
सरक रहा हर साल जी,
तिथि बदल कर, माह बदलता
बदल जाता तब साल जी,
आगंतुक मेहमान खास है,
स्वागत करो व मान जी,
तुम्हारा इसका साथ रहेगा,
सालभर, रहे ध्यान जी.
थोड़े दिन मेहमान रहेगा,
फिर बने मेज़बान जी.
काल चक्र चलता रहेगा,
इसही तरह हो ज्ञान जी.
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सरक रहा हर साल जी,
तिथि बदल कर, माह बदलता
बदल जाता तब साल जी,
आगंतुक मेहमान खास है,
स्वागत करो व मान जी,
तुम्हारा इसका साथ रहेगा,
सालभर, रहे ध्यान जी.
थोड़े दिन मेहमान रहेगा,
फिर बने मेज़बान जी.
काल चक्र चलता रहेगा,
इसही तरह हो ज्ञान जी.
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