गुरुवार, 9 फ़रवरी 2012

हे वीणावरदंड मंडितकरा !

हे वीणावरदंड मंडितकरा !
वीणा वादिनी!
सरस्वती भगवती!
सु-मधुर स्वर दे!
वीणा वादिनी! वर दे,

तार मिलाये वीणा के जब,
कोमल मधुर संगीत मिला,
नवल रागिनी, ताल, लय, छंद
सरल नवल नवगीत मिला,
सुमधुर संगीतमीत वर दे...

कभी भैरवी, मालकौंश तो
बागेश्वरी, खमाज, की तान
भूपाली के स्वर, आलाप, लय,
कभी बजाऊँ बिहाग की बान,
कोमल मधुर संगीत स्वर दे...

तकधिन धिनधा,धागे नतीनक धिन,
रहूं संगीत में मगन रात दिन ,
गीत संगीत प्रिय मीत मेरा,
देवी सरस्वती-कृपा का घेरा,
मधुर जीवनसंगीत वर दे...

कोमल मधुर संगीत स्वर दे,
वीणा वादिनी! वर दे,.

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