मेरी कविता
संगीत-ज्योतिर्मय,
मेरी कविता
समस्त संसार हुआ
ज्योतिर्मय,
मधुर संगीत ध्वनि,
झंकृत कर,
नदियों के प्रवाह में,
कलकल,
निर्झर के प्रपात में,
झर झर,
दिक्-दिशायें,
तरंग मधुरमय
खगवृन्द उड्डगण के,
नृत्य में,
लहराते खेतों में,
जीवन,
रंगीन पुष्पों की,
तान-श्रृंगार,
पवित्र संगीत की धारा,
अनंत आकाशों के छोरों तक,
लहराने वाला जीवन,
संगीतमय श्वास लेता है,
अडचनों को पार कर,
सुखद गुनगुनाहट मृदु तान,
सुन, मैं चकित,
आनंद-विभोर हो जाती हूँ,
मेरा हृदय विव्हल हो,
संगीत से जुड़,
मेरी आवाज़, अडचन,
फट फट जाती है.
और, मैं विभोर, अचंबित,
चुपचाप रो लेती हूँ ,
ओह मेरे प्रभु!
तुम्हारा मधुर! गीतसंगीत !!
मम हृदय, अटूट-प्रेम पाश में,
बन्ध गया है!!