सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

अम्बुआ की डाली, बौर लगी है...

सावन के झूले।।।

अम्बुआ की डाली, बौर लगी है
रिमझिम रिमझिम पड़े बौच्छार,

सावन के झूलेलगे हैं ,
बाबुल बुआ ले अबकी बार,

सखियों संग झूला झूलेंगे
अंगना में आई रे बहार!!

हाथों में महंदी लागि है ,
अखियन कजरा, गजरा बाल.

गाओ री कजरी ओ सखी मोरी,
तबला बोले, धिन धिन धा,

छन-छना-छन, छन-छन चूड़ी
बाँहों में सदा है बहार,

मोरनी नाचे है बागाँ मां,
मोरला नाचे आधी रात,

पीहू पीहू कर शोर मचावे,
पूच्छे मोरा पीहू कहाँ?

मन में कुछ कुछ होता डोले,
लरजे मनवा मधुर हमार,

सावन के झूले डाले हैं ,
अंगना में आई  है बहार!!

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