सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

पतंग है मेरी सोन चिड़ी,

पतंग है मेरी सोन चिड़ी,

सर्रसरातीं तीर सरीखी,
पंख फैलाये फर्राटे से,
लम्बी डोर माँझे की पकड़ी,
हवा सी उड़ी कर्राटे से ,
सखी सहेली संग लिए,
सूरज से मिलने यों कढ़ी,
पतंग है मेरी सोन चिड़ी।

भरा आकाश पतंगों से,
जो लम्बीं और नुकीली सी,
इन्द्रधनुषी रंगीन पतंगें,
सतरंगी सर्पीली सी,
दिनकर का स्वागत वे करतीं,
झुण्ड बना कर निकल पड़ीं,
पतंग है मेरी सोन चिड़ी।

प्रतियोगिता का खेल बढ़ा
लो 'बो काटा' यह जंग लड़ा,
लूटी पतंग, जब कटी पतंग,
इस ओर पतंग, लो डोर पतंग,
लो, उलझा मांझा हाथ कटा,
और खेल बेमेल, अब सिर फटा,
अम्मा ले आईं हाथ छड़ी,
पतंग है मेरी सोन चिड़ी।

अब घर चलो बोलीं अम्मा,
संक्रांति पूजा लोहड़ी जमा,
सेंकें अंगीठी, नाचें, झूमें,
खील बतासे, गुड़ मखाने,
तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी ,
दावत मूंगफली- खूब उड़ी,
पतंग है मेरी सोन चिड़ी,

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